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यह दुनिया आपको अपने पुरखों से नहीं बल्कि नई पीढ़ी से उधार मिली है, इसे संभालकर रखिए
होटल शेरेटन ग्रैंड पैलेस में चल रही कूल कॉन्क्लेव के दूसरे दिन पद्म भूषण से सम्मानित हाफिज कांट्रेक्टर का विशेष सत्र
इंदौर। हमारे पास दुनिया की बस दो फीसदी जमीन है और हम उसका भी ख्याल नहीं रखते हैं। हमें अपने जंगलों और वेटलेंड का ख्याल रखना होगा। विकास के नाम पर अंधाधुंध पेड़ों की कटाई से हम अपने घर को तबाह करते जा रहे हैं। एक अफ्रीकन कहावत है कि हमें यह दुनिया आपको अपने पुरखों से नहीं बल्कि नई पीढ़ी से उधार मिली है इसलिए इसे संभालकर रखिए। आप जमीन को दोबारा नहीं बना सकते हैं।
यह बात देश में पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए कई गगनचुंबी इमारते बनाने वाले पद्म भूषण से सम्मानित आर्किटेक्ट हाफिज कांट्रेक्टर ने कूल कॉन्क्लेव 2.0 के दूसरे दिन कही। इंडियन सोसाइटी ऑफ हीटिंग, रेफ्रिजरेटिंग एंड एयर कंडीशनिंग इंजीनियर्स (ISHRAE) द्वारा आयोजित इस कॉन्क्लेव में उन्होंने अपने सस्टेनेबल प्रोजेक्ट्स के बारे में प्रेजेंटेशन भी दिया।
इस मौके पर एनर्जी स्वराज फाउंडेशन के प्रो चेतन सिंह सोलंकी ने कहा कि आज हम जिस लाइफस्टाइल को जी रहे हैं वह हमारे अपने स्वास्थ्य के लिए भी बेहतर नहीं है। बिजली का हम जितना उपयोग करते हैं उतना ही कार्बन एमिशन बढ़ता है और इसके दुष्परिणाम हमें आने वाले तीन सौ सालों में दिखाई देने लगेंगे। हम विकास कर रहे हैं पर ग्लोबल वार्मिंग और क्लाइमेट चेंज की कीमत पर, इसलिए हमें समझना होगा कि आखिर हम किस दिशा में विकास कर रहे हैं। छोटे-छोटे कमिटमेंट हमारे कार्बन एमिशन को कम कर सकते हैं, जैसे एक जोड़ी कम कपड़े लेना, बिजली बचाना और गाड़ियों के उपयोग को कम करना।
कार्बन फुटप्रिंट काउंट कर रहे हैं ग्राहक
आईटीसी होटल्स के टेक्निकल सर्विस हेड राहुल प्रभाकर कहते हैं कि लोगों में अब जागरूकता काफी बढ़ चुकी है। पहले जब सस्टेनेबल प्रैक्टिस की बात होती थी तो लोग उसे समझ नहीं पाते थे पर अब वे होटल बुक करने के पहले ये चेक करते हैं कि होटल कितना एनवायरमेंट फ्रेंडली है। टॉप क्लाइंट्स इसी आधार पर होटल बुकिंग करने लगे हैं। यही वजह है कि अब हॉस्पिटैलिटी इंडस्ट्री भी सस्टेनेबल प्रैक्टिसेज को लेकर कंसर्न है और हम इस तरह की कॉन्क्लेव का हिस्सा बनकर अपने कार्बन फुटप्रिंट को कम करने का प्रयास कर रहे हैं।
बिजली की तरह पूरे शहर को मिले कूलिंग सर्विस
कूल कॉन्क्लेव के कन्वीनर आशु गुप्ता कहते हैं कि दुनिया का तापमान सिर्फ डेढ़ डिग्री बढ़ने पर ही बड़े क्लाइमेट चेंज दिखाई देने लगेंगे और दो डिग्री तक तापमान बढ़ने के बाद इस परिस्थिति को ठीक करना भी संभव नहीं होगा इसलिए हमें आज से कोशिश शुरू करनी होगी। हमें नई तकनीक की मदद से कार्बन एमिशन को कम करना होगा और इस तरह की कॉन्क्लेव के जरिए इंडस्ट्री को इन तकनीकों के बारे में जानकारी मिलती है। सस्टेनेबल डिज़ाइन के लिए भले ही उस समय कॉस्ट ज्यादा लगे पर आने वाले पांच सालों में ही वह आपके इतने रिसोर्सेस बचने लगेंगे कि आपको वह डिज़ाइन कॉस्ट इफेक्टिव लगेगा। इशरे के वाइस प्रेसिडेंट मिथुल शाह ने बताया कि इस कॉन्क्लेव के दौरान सरकारी अधिकारियों, आर्किटेक्ट्स, एमएसएमई और इंडस्ट्री एक्सपर्ट के लिए अलग-अलग सेशन कर रहे हैं। एक विशेष सेशन के तहत यह बताया गया कि अलग-अलग एसी लगाने के बजाए हम बिजली की तरह पूरे शहर में इंटीग्रेटेड कूलिंग सर्विस दे सकते हैं। इन सेशंस से देश के कार्बन फुटप्रिंट को कम करने के लिए ऐसे ही कई यूनिक आइडियाज मिलेंगे।
दो दिन में हुई 280 बी 2 बी मीटिंग्स
कूल कन्क्लेव चेयर पर्सन पंकज धारकर ने कहा कि इन दो दिनों में कई इनोवेटिव आइडियाज इंडस्टी एक्सपर्ट से शेयर किए गए हैं। आने वाले समय में आप इनके सकारात्मक प्रभाव भी देखेंगे। को-चेयर पर्सन निशांत गुप्ता ने बताया कि पहले दिन 80 और दूसरे दिन 200 से ज्यादा बी 2 बी मीटिंग्स कराई गई है। इससे इंडस्ट्री में नए कोलैबोरेशन और आइडियाज बढ़ेंगे। इंदौर चैप्टर के अध्यक्ष अंकुश झंवर कहते हैं कि कॉन्क्लेव में शामिल हुए एक्सपर्ट्स ने अपने अनुभवों के जरिए इंडस्ट्री को नई दिशा दी है। कार्बन एमिशन को कम करने के लिए हमने कई महत्वपूर्ण टेक्नोलॉजी पर चर्चा की है। ISHRAE इंदौर के सचिव मनीषराज त्रिपाठी और मीडिया प्रभारी मिलिंद इंगोले ने बताया कि समापन सत्र में शनिवार को विशेष अतिथि के रूप में सांसद शंकर लालवानी और खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास सारंग उपस्थित रहेंगे।


